Thursday, 18 February 2016

लघु ज्योतिष एवं वास्तु संगोष्ठी दि. 15.2.16 (द्वारा "इंटरनेशनल सेंटर फॉर ज्योतिष, वास्तु, स्पिरिचुअल एंड कल्चरल एक्टिविटीज") देखें वास्तु टिप्स का उपयोगी वीडियो



संगोष्ठी में ज्योतिर्विद् महावीर कुमार सोनी के ज्योतिषीय उपायों के लेखों को लेकर प्रकाशित "ज्योतिष भारती" अंक का विमोचन भी किया गया
जयपुर। ज्योतिष वास्तु, एवं रेकी जेसी स्प्रिचुअल विद्याओं में शोध एवं अनुसन्धान को गति देने के क्रम में इंटरनेशनल सेंटर फॉर ज्योतिष, वास्तु स्प्रिचुअल एंड कल्चरल एक्टिविटीज ट्रस्ट (रजि.) द्वारा जयपुर में दिनांक 15.2.16 को फिर एक लघु संगोष्ठी का आयोजन किया गया, इसमें ज्योतिषी एवं वास्तुविद के रूप में आचार्य घनश्याम शर्मा, ज्योतिर्विद् महावीर सोनी, श्रीमती गायत्री वर्मा, श्रीमती मीनाक्षी शर्मा, श्रीमती बबीता राठी, श्रीमती संतोष चतुर्वेदी, डॉ. टीना जैन, श्रीमती संगीता माथुर, दिनेश कुमावत, संकेत राज भारद्वाज आदि द्वारा हिस्सा लिया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता ज्योतिर्विद्, हस्तरेखाविद् एवं वास्तुविद महावीर कुमार सोनी द्वारा की गई, संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने बताया कि आज की संगोष्ठी का मुख्य विषय धन एवं सुख शांति बढ़ाने के उपायों पर केंद्रित रखा जा रहा है, वास्तु दोष संबंधी किन कारणों से सुख शांति बाधित होती है, कड़ी मेहनत के बाद भी आशा अनुसार धन कम आता है या अपेक्षा अनुसार टिकता नहीं है, इस सम्बन्ध में बिना विशेष तोड़फोड़ या विशेष परिवर्तन के क्या क्या उपाय हैं, पर मुख्य रूप से आज चर्चा - परिचर्चा की जावेगी, सोनी ने कहा कि सभी विद्वानजनों से अनुरोध किया कि वे अपने ज्ञान व योग्यताओं के परिप्रेक्ष्य में अपने अनुभव लिए हुए सटीक उपाय ही यहाँ शेयर करें। सोनी ने आगे बोलते हुए बताया कि संगोष्ठी के अंत से पूर्व, अर्थात आपस में चर्चा परिचर्चा के बाद कोई भी दो वक्ताओं द्वारा आमजन को वास्तु टिप्स बताने हेतु दो वीडियो भी तैयार किए जावेंगे, जो यू- ट्यूब पर अपलोड किए जावेंगे। इसके बाद इस क्रम में सभी उपस्थित ज्योतिर्विदों एवं वास्तुविदों द्वारा ज्योतिष एवं वास्तु विषयों पर पर चर्चा परिचर्चा की गई, विशेष रूप से बिना तोड़फोड़ के वास्तु दोष संबंधी उपचारों पर जानकारियां शेयर की गई। गोष्ठी में नागरिक कल्याण परिषद के अध्यक्ष वीरेंद्र गोदिका एडवोकेट एवं गठजोड़ की संपादक श्रीमती सुरेखा सोनी ने भी हिस्सा लिया। इस अवसर पर ज्योतिर्विद् महावीर कुमार सोनी के ज्योतिषीय उपायों संबंधी नवीन शोध एवं अनुसंधानों के लेखों को लेकर प्रकाशित "ज्योतिष भारती" अंक का विमोचन भी किया गया। इस अंक में सफलता हेतु अपना नाम कैसे अक्षरों को लेकर लिखा जावे, बालक बालिका के भावी जीवन में सफलता हेतु नामकरण की सही विधि क्या है, ग्रह शांति के उपायों में रत्न धारण में क्या क्या सावधानियां आवश्यक है, सहित विभिन्न लेख हैं। संगोष्ठी के अंत से पूर्व वीडियो जारी करने हेतु वक्ताओं के रूप में प्रख्यात ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद आचार्य घनश्याम शर्मा एवं श्रीमती मीनाक्षी शर्मा को चुना जाकर इनके द्वारा धन एवं सुखशांति बढ़ाने हेतु अपने टिप्स आमजन हेतु बताए गए, जिस पर आधारित वीडियो निम्न लिंक पर जाकर देखे जा सकते हैं -
Part 1
https://www.youtube.com/watch?v=KH-kXi3GZ1Y
Part 2
https://www.youtube.com/watch?v=cj8X7irG42c





Saturday, 13 February 2016

वर्ल्ड क्लास सिटी बनने की ओर अग्रसर पिंकसिटी (जयपुर) में ज्योतिष एवं वास्तु विषयों पर संगोष्ठी के दौरान ज्योतिष अनुसन्धान एवं स्वच्छ भारत अभियान से जुड़े पोस्टरों द्वारा कार्यक्रमों को गति प्रदान की जयपुर सिटी के मेयर निर्मल नाहटा ने, इस अवसर पर साथ में रहे कार्यक्रम संचालक ज्योतिर्विद् महावीर सोनी, गणमान्य नेतागण एवं प्रख्यात ज्योतिष शास्त्री

जयपुर। इंटरनेशनल सेंटर फॉर ज्योतिष, वास्तु, स्पिरिचुअल एन्ड कल्चरल एक्टिविटीज ट्रस्ट की ओर 14, किसान मार्ग, जयपुर पर ज्योतिष एवं वास्तु विषयों पर  वर्कशॉप एवं लघु सेमीनार आयोजित की गई। सेमीनार प्रात: 10 बजे से सांय 5 बजे तक चली। सेमीनार में बड़ी संख्या में उपस्थित ज्योतिषियों एवं वास्तुविदों के बीच "जटिल समस्याओं एवं रोगों का ज्योतिष के परिप्रेक्ष्य में निदान" विषय पर चर्चा, विचार विमर्श हुआ। वर्कशॉप एवं सेमीनार की अध्यक्षता करते हुए ज्योतिर्विद् एवं हस्तरेखाविद महावीर कुमार सोनी ने कहा कि सृष्टि एवं विश्व पर मंडरा रहे बड़े खतरों को भी ज्योतिष एवं रेकी विषयों पर शोध एवं अनुसंधान द्वारा गति देकर दूर किया जा सकता है, कम किया जा सकता है, उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में हर वर्ग द्वारा प्रोत्साहन की आवश्यकता है। इस सेमीनार  में कई गण मान्य हस्तियां उपस्थित हुई, जिनमें जयपुर के मेयर श्री निर्मल नाहटा, जयपुर शहर भाजपा अध्यक्ष श्री संजय जैन, राजस्थान राज्य बुनकर संघ के अध्यक्ष श्री महेश शर्मा, भाजपा पार्षद  श्री महेंद्र अजमेरा प्रमुख थे। समारोह के अंत में स्वच्छ भारत अभियान पर विशिष्ट सन्देश लिए हुए "इंटरनेशनल सेंटर फॉर ज्योतिष, वास्तु, स्पिरिचुअल एण्ड कल्चरल एक्टिविटीज ट्रस्ट" द्वारा जारी पोस्टर द्वारा "स्वच्छ भारत अभियान" को भी गति प्रदान की गई। सेमीनार में ज्योतिर्विद् महावीर सोनी के साथ डॉ. टीना जैन, अनुपमा अग्रवाल, संगीता माथुर, श्रीमती संतोष चतुर्वेदी, गायत्री वर्मा आदि प्रख्यात ज्योतिष एवं वास्तुविदों ने ज्योतिष एवं वास्तु से जुड़े विभिन्न विषयों पर महत्वपूर्ण प्रकाश डाला, जन्मकुंडली के परिप्रेक्ष्य में जटिल रोगों एवं समस्याओं पर अपने अपने अनुभव बताते हुए अपने विचार प्रकट किए, उपस्थित लोगों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। सेमीनार में सचिवालय कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष लोकप्रिय कर्मचारी नेता मेघराज पंवार, सामाजिक नेता एवं समाज रत्न विनोद जैन कोटखावदा, अक्षय मोदी, संकेत राज भारद्वाज, श्रीमती ममता जैन एडवोकेट, राजकुमार सेठी, दिनेश पाटनी ने भी ज्योतिष एवं वास्तु विषयों की उपयोगिता एवं महत्ता पर अपने विचार प्रकट करते हुए अपने अपने प्रश्नों का समाधान प्राप्त किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में सभी गणमान्य अतिथियों का ट्रस्ट एवं सहयोगी संस्थाओं की ओर से माल्यार्पण एवं शॉल ओढ़ाकर अभिनन्दन किया गया।  ज्योतिर्विद् महावीर कुमार सोनी ने गण मान्य अतिथियों का इस लघु कार्यक्रम में उपस्थित होने के लिए विशेष आभार प्रकट किया।कार्यक्रम के दौरान ज्योतिष से जुड़े पोस्टर एवं गठजोड़ के नवीन अंक का विमोचन भी किया गया। आयोजित हुए कार्यक्रमों की कुछ प्रमुख झलकियां निम्न रही।

















Monday, 1 February 2016

वर्कशॉप एवं संगोष्ठी में ज्योतिष अनुसंधान एवं स्वच्छ भारत अभियान से जुड़े पोस्टरों द्वारा अभियानों को गति प्रदान की जयपुर के महापौर श्री निर्मल नाहटा ने


🌷🌷सृष्टि एवं विश्व पर मंडरा रहे बड़े खतरों को भी ज्योतिष एवं रेकी विषयों पर शोध एवं अनुसंधान द्वारा गति देकर दूर किया जा सकता है- ज्योतिर्विद् एवं हस्तरेखाविद महावीर कुमार सोनी 
जयपुर 31 जनवरी। इंटरनेशनल सेंटर फॉर ज्योतिष, वास्तु, स्पिरिचुअल एन्ड कल्चरल एक्टिविटीज ट्रस्ट की ओर 14, किसान मार्ग, जयपुर पर ज्योतिष एवं वास्तु विषयों पर वर्कशॉप एवं लघु सेमीनार आयोजित की गई। सेमीनार प्रात: 10 बजे से सांय 5 बजे तक चली। सेमीनार में बड़ी संख्या में उपस्थित ज्योतिषियों एवं वास्तुविदों के बीच "जटिल समस्याओं एवं रोगों का ज्योतिष के परिप्रेक्ष्य में निदान" विषय पर चर्चा, विचार विमर्श हुआ। वर्कशॉप एवं सेमीनार की अध्यक्षता करते हुए ज्योतिर्विद् एवं हस्तरेखाविद महावीर कुमार सोनी ने कहा कि सृष्टि एवं विश्व पर मंडरा रहे बड़े खतरों को भी ज्योतिष एवं रेकी विषयों पर शोध एवं अनुसंधान द्वारा गति देकर दूर किया जा सकता है, कम किया जा सकता है, उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में हर वर्ग द्वारा प्रोत्साहन की आवश्यकता है। इस सेमीनार में कई गण मान्य हस्तियां उपस्थित हुई, जिनमें जयपुर के मेयर श्री निर्मल नाहटा, जयपुर शहर भाजपा अध्यक्ष श्री संजय जैन, राजस्थान राज्य बुनकर संघ के अध्यक्ष श्री महेश शर्मा, भाजपा पार्षद श्री महेंद्र अजमेरा प्रमुख थे। समारोह के अंत में स्वच्छ भारत अभियान पर विशिष्ट सन्देश लिए हुए "इंटरनेशनल सेंटर फॉर ज्योतिष, वास्तु, स्पिरिचुअल एण्ड कल्चरल एक्टिविटीज ट्रस्ट" द्वारा जारी पोस्टर द्वारा "स्वच्छ भारत अभियान" को गति प्रदान की गई। सेमीनार में ज्योतिर्विद् महावीर सोनी के साथ कार्यक्रम संयोजक डॉ. टीना जैन, अनुपमा अग्रवाल, संगीता माथुर, श्रीमती संतोष चतुर्वेदी, गायत्री वर्मा आदि प्रख्यात ज्योतिष एवं वास्तुविदों ने ज्योतिष एवं वास्तु से जुड़े विभिन्न विषयों पर महत्वपूर्ण प्रकाश डाला, जन्मकुंडली के परिप्रेक्ष्य में जटिल रोगों एवं समस्याओं पर अपने अपने अनुभव बताते हुए अपने विचार प्रकट किए, उपस्थित लोगों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। सेमीनार में सचिवालय कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष लोकप्रिय कर्मचारी नेता मेघराज पंवार, सामाजिक नेता एवं समाज रत्न विनोद जैन कोटखावदा, अक्षय मोदी, संकेत राज भारद्वाज, श्रीमती ममता जैन एडवोकेट, राजकुमार सेठी, दिनेश पाटनी ने भी ज्योतिष एवं वास्तु विषयों की उपयोगिता एवं महत्ता पर अपने विचार प्रकट किए। कार्यक्रम के प्रारंभ में सभी गणमान्य अतिथियों का ट्रस्ट एवं सहयोगी संस्थाओं की ओर से माल्यार्पण एवं शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया गया। ज्योतिर्विद् महावीर कुमार सोनी ने गण मान्य अतिथियों का इस लघु कार्यक्रम में उपस्थित होने के लिए विशेष आभार प्रकट किया।
🙏🌷कार्यक्रम संबंधी कुछ प्रमुख झलकियों की फोटोज - 

                                             














Wednesday, 27 January 2016

ज्योतिष एवं वास्तु विषयों पर नि:शुल्क वर्कशॉप

जयपुर। इंटरनेशनल सेंटर फॉर ज्योतिष, वास्तु, स्पिरिचुअल एन्ड कल्चरल एक्टिविटीज ट्रस्ट की ओर से ज्योतिष एवं वास्तु विषयों पर एक लघु वर्कशॉप रविवार, दिनांक 31 जनवरी को प्रात: 10 से सांय 5 बजे तक जयपुर (राजस्थान) में आयोजित होने जा रही है। जो भी  इस वर्कशॉप में आकर इन विषयों पर समाधान चाहते हैं, जानकारी अर्जित करना चाहते हैं, वे मोबाइल पर फोन कर अपना रजिस्ट्रेशन करा लें।
वर्कशॉप पूर्णत: नि:शुल्क आयोजित हो रही है, वर्कशॉप किसान मार्ग, टोंक फाटक पर होगी, वर्कशॉप हेतु स्थान सीमित हैं, जो पूर्व में फोन द्वारा रजिस्ट्रेशन करावेंगे, वो ही इसमें हिस्सा ले सकेंगे।
डॉ. टीना जैन, कार्यक्रम संयोजक
मो. 07822061620
     09782560245

Saturday, 23 January 2016

Wikipedia 15th Birthday was celebrated in Jaipur - Jyotirvid Mahavir Kumar Soni, ICJVSCA

Apabhraṃśa Sahitya needs attention @Wikipedia
Jaipur , 17  January 2016:  Wikipedia 15th Birthday was celebrated at Shilp Gram side of Jawahar Kala Kendra, Jaipur.   Wikipedia completed its 15th year as The World’s Encyclopedia on January 15th 2016. It is considered as the prime source of information by the most of the people in the world.
Wikipedia is a Web-based, multi-language, free-content encyclopedia written collaboratively by volunteers, scholars, researchers and literates around the world. It has editions in about 180 languages and contains entries on traditional encyclopedic topics and on almanac, gazetteer, and current events topics. It contains about 2.3 million articles. More than 700,000 of these are in English, more than 250,000 in German, more than 150,000 in French and more than 100,000 in Japanese, Swedish and Italian. 
Among the distinguished guests the former chairperson of RSHRC Justice Nagendera Kumar Jain said:-
 “Wikipedia is doing a tremendous job of providing unprecedented help support and guidance in the form of information as the world encyclopedia. It is playing a very crucial & important role in our life just like Veda’s & Purans have shaped our present civilization. It is going shape the future world being a reliable digital source of info. on any subject topic ranging from a pin-point till inter Galactic black-holes and beyond. With this kind of information reference we have to get actively get involved and present the correct information on topics like Apabhraṃśa Sahitya or Literaturewhich is almost extinct due to prevalence and social religious dogma. In other words we must increase the efforts in training our researchers and scholars to get involved on such platform and provide the correct picture”
imilarly, Prof. Kamal Chand Sogani eminent scholar of Apabhraṃśa Sahitya Academysaid: “We have to keep the pace with the rest of the world and provide the most reliable and credible interpretations of the Manuscripts or Pandulipis. Since the present generation is already so much involved in understanding the modern infrastructure there is a stronger need for scholars and literates to ensure unbiased information in its core form.” He further took the guests around the Reception and ICH side of the JKK and explained the wall depictions from these scriptures.
National Fame Jyotirvid and Senior Journalists Mahavir Kumar Soni fromInternational centre for Jyotish, Vastu, Spiritual & Cultural Activities Trust said: “Wikipedia is already holding a detailed documentation on the topics like History, Jyotish, Vastu and Culture supported with the relevant references & research work published so far. But some of the research work which was never published and is kept as Sacred Notes locked in the temples shall get justice and place on Wikipedia”    
One of the Anonymous contributors wearing a mask said “Wikipedia is already guiding the Artificial intelligence and it will be treated as the future reference and we have to ensure that machines are able to identify the humanitarian aspects”
The celebrations were concluded with the release of best wishes for Wikipedia hand written on wishing lanterns by the guests.



Wednesday, 6 January 2016

पर्यावरण को कैसे मिले बड़ी गति - ज्योतिर्विद महावीर कुमार सोनी

पर्यावरण को बचाना  एवं पर्यावरण गतिविधियों को बढाना सबसे बड़ा उद्देश्य घोषित किया जाना चाहिए, इसमें अब जरा सा भी विलम्ब नहीं किया जाना चाहिए। पर्यावरण के लिए जो भी व्यक्ति या संस्थाएं काम कर रही है, कर रहे हैं, चाहे उनमे कोई कम कर रहा है या  कोई ज्यादा, सभी को प्रोत्साहित किया जाने के प्रयास किए जाकर उनको इस हेतु और आगे लाने के प्रयास होने चाहिए। मेरे विचार से पब्लिक ट्रांसपोर्ट  को इस प्रकार से अच्छा एवं सुविधाजनक किया जाना चाहिए कि आमजन इनमें ही सवारी को  प्रोत्साहित हो, अर्थात स्वयं के वाहन होने के बावजूद लोग इन पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ही उपयोग करे, इसके प्रयास अविलम्ब होने चाहिए। पब्लिक ट्रांसपोर्ट को कैसे अच्छा से अच्छा किया जा सकता है, इस हेतु दुपहिया एवं चार पहिया वाहन चालको को बड़ी संख्या में शामिल करते हुए सभी से सुझाव लिए जाने चाहिए,  इनसे ही मुख्य रूप से पूछा जाना चाहिए कि ये किस स्थिति में अपने निजी वाहनों को छोड़ कर पब्लिक ट्रांसपोर्ट को महत्व दे सकते हैं। एक ही क्षेत्र में आसपास के कार्यालयों के अधिकारी कर्मचारियों  के लिए विशेष बसें लगाने पर विचार किया जाना चाहिए, एक ही रूट पर आने वाली कॉलोनियों से अधिकारी कर्मचारी किस स्थिति इन बसों में ऑफिस आने जाने के लिए उत्साहित होंगे, तैयार होंगे,  इस पर विचार कर सुझावों पर शीघ्र क्रियान्वन किया जाना चाहिए।  डीजल से चलने वाली गाड़ियों से प्रदूषण पेट्रोल के तुलनात्मक रूप से कितना अधिक एवं वातावरण में  कितना तेजी से जल्दी बढ़ रहा है, इसकी समीक्षा/जांच की जाकर, इनको कम करने  या बंद करने आदि पर भी विचार किया जा सकता है। प्रदूषण कम फैलाने वाले  या बिलकुल नहीं फैलाने वाले रिक्शा आदि जैसे वाहनों  को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

Thursday, 31 December 2015

पर्यावरण को कैसे मिले बड़ी गति, अध्यात्म एवं ध्यान की सिद्धि के लिए भी भारत की प्राचीन पर्यावरणीय व्यवस्था को पुनः स्थापित करने को मूलभूत आवश्यकता मानते हुए पूरा करने पर शीघ्र ध्यान देने की आवश्यकता - ज्योतिर्विद महावीर कुमार सोनी


तमाम भौतिक सुख सुविधाओं के बावजूद आज मनुष्य अपने आपको अत्यंत अशांत महसूस कर रहा है, यूं कहना चाहिए कि  जैसे जैसे हमने भौतिक सुख साधन जुटाएं हैं, हमने हमारी मन की शान्ति खो दी है। कोई कहे कि मैं यह कैसे कह रहा हूँ कि मनुष्य अपने आपको अशांत महसूस कर रहा है, इसके जवाब में मेरा तर्क होगा कि आज जगह जगह ध्यान केंद्र चल रहे हैं, मेडिटेशन सेंटर चल रहे हैं, लोगों की बेतहाशा भीड़ उनमें अपनी शान्ति खोज कर रही है, यह इसी  बात का प्रमाण है।   विदेशी लोग जिस शांति को भारत की मंत्र, योग, प्रार्थना एवं विभिन्न आध्यात्मिक आहार विहार की साधनाओं एवं क्रियाओं द्वारा प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं हम विगत दशकों में इनसे दूर पर दूर हुए हैं ।  कई सालों से मेरा इस बारे में चिंतन मनन चलता रहा है,  मेरे मस्तिष्क में बहुत सारी बाते आती जाती रही है, नए नए विचार आए हैं, जिनके परिप्रेक्ष्य में  कुछ को मैं यहाँ शेयर करने जा रहा हूँ. हमारा भारत ध्यान एवं विशिष्ट विद्याओं का मुख्य केंद्र हुआ करता था, इसका एक मुख्य कारण हमारे ऋषि मुनि का ध्यान में तल्लीन हो जाना, ध्यान की सिद्धि प्राप्त हो जाना, जो अब दूर हो गई है। ध्यान की सिद्धि से त्रि -नेत्र खुलना सम्भव होना, टेलीपैथी जैसी योग्यताएं प्राप्त होना सम्भव था। ध्यान की सिद्धि के लिए जो वातावरण एवं परिस्थितियाँ  हमारे देश में ज्यादा रूप में सुलभ तरीके से उपलब्ध होती  थी वो अन्यत्र कम थी। हमारे देश की आध्यात्मिक व्यवस्था के अनुसार आयु के अंतिम वर्षों में संन्यास ले लेना या संन्यास के तुल्य जैसा जीवन बिताना शामिल था, अर्थात राग, द्वेष, मोह को बिलकुल छोड़ना या कम करना, आत्मा के कल्याण की तरफ ध्यान देना शामिल था, जो कि जंगलों एवं निर्जन पर्वतों पर ही सम्भव थी। भौतिक विकास करने की तरफ ध्यान देने में हम हमारी इस मूलभूत आवश्यकता को भूल से गए हैं। आज का मेरा यह लेख इसी मूल आवश्यकता को पूरा करने या कराने के तरफ ध्यान दिए जाने पर केंद्रित है, जिसको यदि पूरा किया जावे तो पर्यावरण सरंक्षण को तो बढ़ावा मिलेगा ही, साथ ही साथ पर्यावरणीय विषमताओं के कारण हो रही बीमारियों एवं विभिन्न कष्टों को रोकने की दिशा में भी गति सम्भव होगी। मेरे विचार से हम जिस नगर उप नगर में रहते हैं, उसके बाहर भी बड़े क्षेत्र को घेरे हुए इस तरह के जंगल होने चाहिए, जिनको यहाँ  जंगल तो विषय की स्पष्टता दर्शाने की दृष्टि से कहा जा रहा है, मेरा अभिप्राय: घने विशाल पेड़ पौधों, नदी नालों कंकर पत्थर युक्त  शिला आदि लिए हुए बड़े स्थान उपलब्ध होने से है, अर्थात जंगल जैसा दिखने वाला ऐसा वातावरण हो, जिसमें खतरनाक किस्म के जानवरों को छोड़कर सब तरह के जानवर (पशु - पक्षी)  भी जीवन यापन कर सकें। विभिन्न जाती - प्रजाति के पशु पक्षियों का पर्यावरणीय संतुलन बनाने में बड़ा योगदान होता है, इनका धीरे धीरे लुप्त हो जाना पर्यावरणीय विषमता को बढ़ाने का एक बहुत बड़ा कारण है। स्वन्त्रता सभी को प्रिय होती है, पशु पक्षी को भी स्वन्त्रता उतनी ही अच्छी लगती है जितनी हमें । हम इनको बन्धन में रखकर बचाना चाहते हैं, जो सम्भव नहीं है, किसी जाती -  प्रजाति को बंधन में रखते हुए हम बढ़ाना चाहें,  सम्भव नहीं है । आज सभी लुप्त होती जा रही पशुओं की विभिन्न प्रजातियों को बचाना चाहते हैं और बढ़ाना चाहते हैं  यह तभी सम्भव है जब हम इन्हें स्वन्त्रता पूर्वक विचरण करने वाला वातावरण दे सकें, तभी लुप्त होती जा रही प्रजातियों को बचाना सम्भव है, उक्त दृष्टि से भी उक्त पर्यावरणीय वातावरण बनाना आवश्यक है, यदि सम्भव बन सके तो ऐसे पर्यावरणीय वातावरण युक्त बड़े स्थान को सभी तरह की तरंगो, बिजली आदि के विभिन्न प्रभावों से मुक्त भी रखा जावे। 
आज के आधुनिक परिप्रेक्ष्य में मैं उक्त स्थान पर कोई जंगल स्थापित  होने की बात करूँ तो आपको बड़ी अटपटी या बेहूदी लगेगी, केवल विषय की स्पष्टता की दृष्टि से मैं यहाँ जंगल शब्द प्रयोंग कर रहा हूँ। यद्यपि हमारी सरकार का ध्यान पर्यावरण संतुलन को लेकर विगत वर्षों में काफी गया है जिसके तहत हर कॉलोनी में आज बगीचे अनिवार्य रूप से बनाए जा रहे हैं, मेरा मानना है यह पर्याप्त नहीं है, हमारे विभिन्न कष्टों एवं बीमारियों का निवारण करने के लिए हमें हमारी कुछ पुरानी व्यवस्थाओं में आधुनिक परिस्थितियों से तालमेल बैठाते हुए लौटना होगा। मेरे चिंतन में स्पष्टत:  यह बात आई है कि विभिन्न तरह के जाति प्रजाति के पशु पक्षी पर्यावरणीय संतुलन को बनाने का काम करते हैं, नदी का जो पानी पेड़ पौधों पर गुजरते हुए विभिन्न तरह के कंकर पत्थरों से टकराते हुए पीने के काम आता था, वो विशेष शक्ति युक्त हुआ करता था, इन सब का हमने अभाव ही कर ही दिया है।  हम ध्यान की सिद्धि चाहते हैं वो ऐसे शांत वातावरण में ही सम्भव है, जहाँ टेलीफोन, मोबाइल, टी वी आदि की तरंगो का अभाव हो,  जहाँ पूर्णतः प्राकृतिक वातावरण हो, जहाँ शान्ति हो, उसी वातावरण में ध्यान आदि की  सिद्धि सम्भव है, हमने बिना सोचे समझे बेतहाशा रूप में जंगल के जंगल काट दिए, वो जंगल, खेत अब वापिस नहीं ला जा सकते और न ही आज के चकाचौंध भरे वातावरण मेरी मांग का कोई समर्थन करने आगे आएगा। जब एक तरफ दूर दूर तक आवासीय  कालोनियां  बसाई जा रही है, शहर के बाहर की जगह की कीमतें करोड़ों को छू रही है, मेरी बात बहुतों को हास्यापद ही लगेगी, किन्तु मैं फिर भी अपना चिंतन सामने रख रहा हूँ, मैं मेरे उक्त विचार को आज की सबसे मूल भूत आवश्यकता के रूप में  सामने रख रहा हूँ। एक समय था जब आदमी अशांति महसूस करता था या उसे वैराग्य हो जाता था, उसको संन्यास की आवश्यकता महसूस होती तो  वो वन को गमन कर जाता था। आज वन नहीं है, बाग़ बगीचें भी आसपास बना दो तो भी ध्यान एवं समाधि का वन जैसा वातावरण वे नहीं दे सकते, जिसके कि अभाव में हमारे ऋषि मुनि वो सिद्धियां या आश्चर्यजनक बातें सामने लाने में सामर्थ्यशील भी नहीं हो सकते, हमारे आसपास विचारों के साथ विभिन्न तरह तरंगो का व्यापक जाल है, प्रदूषित वातावरण है, जिसमें ध्यान की पूर्ण सिद्धि सम्भव नहीं है। हमारे आध्यात्मिक गुरु जन पहले जैसी ऋद्धियाँ प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं, उनमें यह भी एक बड़ा कारण है, जिसमें वन जैसी  उपयुक्त जगह का अभाव होना है। हम जो पर्यावरण को गति दे रहे हैं वह पर्याप्त नहीं है, सृष्टि की रक्षा, पर्यावरणीय संतुलन के लिए उक्त बातों पर विचार आज पहली बड़ी जरुरत होनी चाहिए। विषम होते जा रहे वातावरण में पर्यावरण सरंक्षण को सबसे बड़ा कर्त्तव्य घोषित किया जाना चाहिए, उक्त के अलावा भी जहाँ भी सम्भव हो पर्यावरण बढ़ाने से सम्बंधित कार्य करने वाले को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। हमने देखा है कि विदेशी राष्ट्रों में हमारी विद्याओं/आध्यात्मिक शक्तियों की तरफ समय समय पर ध्यान गया है, उनमे इन सबको लेकर शोध एवं अनुसंधान की तरफ विशेष जिज्ञासा है और तुरंत पहल करने की रूचि भी है, वे उक्त  दिशा में पहले पहल करें, इससे पूर्व हमें इस दिशा में पहल करनी चाहिए,क्योंकि एक इस तरफ बड़ी पहल करने पर पर्यावरण को ज्यादा शीघ्रता से बढ़ा पाएंगे, पशु पक्षी की विभिन्न जाति - प्रजाति को सरंक्षित करने की दिशा में आगे बढ़ते हुए इनके द्वारा होने वाले पर्यावरणीय संतुलन को स्थापित करने में गति कर पाएंगे, हमारे भारतीय जीवन का  जो एक मूलभूत तत्व या उद्देश्य है जिसके तहत हम या हमारे ऋषि मुनि ध्यान साधना के लिए कोई उपयुक्त स्थान/वातावरण पा सकें, उसको पूरा करने में सफल हो पाएंगे। इसके अलावा अनगिनत प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष  ऐसे विभिन्न लाभ जिनसे हम सब में से प्राय :कर सब वाकिफ हैं, को पाने के दिशा में गति  दे पाएंगे।
   
नोट: यह लेख महावीर  कुमार सोनी के चिंतन मनन पर आधारित उनका मूल लेख है, आप इसे कहीं भी पुनः प्रकाशित कर सकते है, बेबसाइट, बेब पोर्टल आदि में दे सकते हैं, किन्तु देते समय लेखक का नाम आवश्यक रूप से दें. पसंद आया हो तो पर्यावरणीय हित में ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।