Sunday, 15 October 2017
कानून के तहत लोगों को सेवा प्रदान करने की गारंटी होनी चाहिए: उपराष्ट्रपति
‘द मेवरिक्स ऑफ मसूरी’ नामक पुस्तक का विमोचन किया |
| भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि कानून के तहत लोगों को सेवा प्रदान करने की गारंटी होनी चाहिए। वह आज यहां श्री एम. रामचंद्रन द्वारा लिखित पुस्तक ‘द मेवरिक्स ऑफ मसूरी’ का विमोचन करने के बाद उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे। उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह किताब सामान्य पाठक को भारतीय प्रशासनिक सेवा या नौकरशाही के कामकाज करने के तरीकों से और भी बेहतर ढंग से अवगत कराने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस पुस्तक में प्रोफेशनल दक्षता एवं कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता के साथ-साथ गवर्नेंस में सुधार सुनिश्चित करने को लेकर लेखक द्वारा की गई कड़ी मेहनत की भी झलक मिलती है। उन्होंने कहा कि सिविल सेवकों को सरकार की नीतियां लागू करने में अनगिनत जटिल चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि ‘अधिकतम शासन एवं न्यूनतम सरकार’ सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय सेवाओं से जुड़े कर्मियों को अभिनव रूप से कार्य करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इसे ‘स्टील फ़्रेम’ के रूप में वर्णित किया गया है जो समाज को एकजुट रखता है क्योंकि इसे देश के कानूनों का एक उद्देश्यपरक कार्यान्वयनकर्ता माना जाता है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश में उच्च सिविल सेवा से जुड़े कर्मी राष्ट्र निर्माण में सर्वाधिक योगदान देने वालों में से एक रहे हैं। देश में पिछली तिमाही के दौरान जीडीपी वृद्धि दर कम रहने के कारण का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने एक ऐसे कॉलेज का उदाहरण दिया, जो अच्छे परिणाम पाने के लिए कदाचार में लिप्त रहता था। जब एक सख्त प्रिंसिपल को कॉलेज में नियुक्त किया गया तो उन्होंने सभी तरह के कदाचार बंद कर दिए और छात्र परीक्षाओं में अनुत्तीर्ण हो गए। इसके परिणामस्वरूप छात्रों, शिक्षकों एवं प्रबंधन ने प्रिंसिपल को दोषी ठहराया है।
***
वीके/आरआरएस/एसएस – 5073 |
Tuesday, 3 October 2017
A short photo film on water conservation programme held in Jaipur ( Rally for Rivers ) मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच से राजस्थान पा रहा सुनहरे आयाम
Monday, 2 October 2017
केंद्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने आईएएस प्रशिक्षुओं का आह्वान किया कि प्रधानमंत्री के न्यू इंडिया के स्वपन को साकार करने में योगदान दें
केंद्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने युवा आईएएस प्रशिक्षुओं का आह्वान किया है कि वे प्रधानमंत्री के न्यू इंडिया के सपने को साकार करने के लिए अपना योगदान दें। वे उत्तराखंड के मसूरी में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में 92वें स्थापना पाठ्यक्रम के अधिकारी प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित कर रहे थे। उऩ्होंने कहा कि ‘आपको लोगों की सहायता के लिए कठिन कार्य करना है। आपको अपने कठिन परिश्रम के जरिए लोगों के बीच विश्वास की भावना पैदा करनी है।‘
केंद्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि अधिकारियों को लोगों के साथ सहानुभूति से पेश आना चाहिए, जो उनके पास अपनी समस्याओं को लेकर आते हैं। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने उन्हें मानवता और देश के सामान्य नागरिकों की सेवा का सुअवसर दिया है। उन्होंने कहा कि आपको लोगों की समस्याओं को टालना नहीं चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आपका दृष्टिकोण व्यक्तिगत नहीं होना चाहिए, बल्कि हमेशा प्रणाली आधारित होना चाहिए।
युवा आईएएस अधिकारियों को सतर्क करते हुए श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘उऩ्हें अपने अहम को टालना चाहिए, क्योंकि अहम दशमलव अंक के समान है, जिसे यदि अंक से पूर्व लगा दिया जाए तो अंक का मूल्य घट जाता है।‘ उन्होंने युवा अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि ‘आपको उच्च नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहना चाहिए और आदर्श बनना चाहिए, लोग आपका अनुकरण कर सकें। उन्होंने कहा कि आप दूसरों के लिए तभी अनुकरणीय बन पाएंगे, जब आप उच्च नैतिक मूल्यों के प्रति दृढ़ रहेंगे। आपको सार्वजनिक जीवन में हमेशा सतर्क रहना चाहिए।‘ उन्होंने प्रशिक्षुओं को उज्जवल भविष्य और सफल कैरियर की शुभकामनाएं दी।
केंद्रीय गृह मंत्री आज बाद में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की माना बॉर्डर आउट पोस्ट जाएंगे। अपनी चार दिन की यात्रा के दौरान श्री राजनाथ सिंह भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के लापथाल और रिमखिम सीमा आउट पोस्ट का दौरा भी करेंगे। वे ऑली में आईटीबीपी के पर्वतीय और कौशल संस्थान में पर्वतारोहन और कमांडो कार्रवाई को भी देखेंगे। वे जोशी मठ में नागरिक कार्य कार्यक्रम और रक्तदान शिविर का उद्घाटन भी करेंगे।
कल श्री राजनाथ सिंह के राज्य के चार दिवसीय दौरे पर देहरादून पहुंचने पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उनकी अगवानी की। दोनों नेताओं ने विभिन्न मामलों पर विचार-विमर्श भी किया।
वीके/पीकेए/एमएस-3979
Sunday, 1 October 2017
2011 में ही शुरू कर दिया था राजस्थान में जल संरक्षण का कार्य - मुख्यमंत्री| राजस्थान जल संरक्षण में पूरे देश में आगे -सद्गुरु जग्गी वासुदेव
मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने कहा कि प्रदेश में जल संकट को देखतेे हुए 2011 में ही जल संरक्षण का काम शुरू कर दिया था, जबकि उस समय प्रदेश में हमारी सरकार नहीं थी। उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहते हुए उन्होंने राजस्थान को जल संकट से निजात दिलाने के लिए प्रयास इसलिए शुरू कर दिए थे क्योंकि यह वोटों का नहीं लोगों की जिन्दगी के सवाल का विषय था।
श्रीमती राजे सीतापुरा स्थित जेईसीसी में गुरुवार को आयोजित नदी अभियान ’रैली फॉर रिवर्स’ में उपस्थित लोगों को सम्बोधित कर रही थीं।
एमजेएसए को बनाया जन अभियान
श्रीमती राजे ने कहा कि राजस्थान में सबसे बड़ा संकट पानी का है। हमने राजस्थान को पानी के संकट से मुक्ति दिलाने का सपना पूरा करने के लिए हमारी सरकार बनते ही ‘राजस्थान रिवर बेसिन अथॉरिटी’ का गठन किया ताकि राजस्थान की नदियों को जोड़ने का काम शुरू कर सकें। उसके बाद प्रदेशभर में मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि एमजेएसए को जन अभियान बनाते हुए हमने समाज के हर वर्ग को इससे जोड़ा। वर्षा जल के संरक्षण के लिए दो साल में करीब ढाई लाख स्ट्रक्चर बनाए जो पानी से लबालब भर गए हैं। इस साल भी करीब 1 लाख जल संरचनाएं बनाई जाएंगी और उम्मीद है कि अगली बारिश में वे भी लबालब भर जाएंगी। हमारा सपना पूरा होगा और राजस्थान जल्द ही पानी के मामले में आत्मनिर्भर बन जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सद्गुरु श्री जग्गी वासुदेव की रैली फॉर रिवर्स यात्रा आज जब राजस्थान से गुजरी है तो एमजेएसए अभियान को भी छूकर जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे जल संरक्षण के हमारे प्रयासों को भी एक नई ऊर्जा मिलेगी।
दूर होगा जल संकट
श्रीमती राजे ने कहा कि आने वाले समय में राजस्थान के लोगों को जल संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कालीसिंध, मेज, चाकन, बनास, गम्भीर तथा पार्वती नदियों के व्यर्थ बहने वाले बरसाती पानी की बूंद-बूंद को बचाने के लिए राज्य सरकार 40 हजार करोड़ रुपये के ’ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट’ पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से 13 जिलों को पेयजल आपूर्ति हो सकेगी। उन्होंने कहा कि राज्य में ब्राह्मणी-बनास इंटरलिंक प्रोजेक्ट पर भी काम किया जा रहा है जिससे ब्राह्मणी नदी के अतिरिक्त पानी को बीसलपुर में डाल कर पेयजल की मांग पूरी की जाएगी। इसके अलावा लुप्तप्राय सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने की सम्भावनाओं पर भी काम किया जा रहा है।
नदियों के संरक्षण के लिए दिलाई जाएगी प्रतिज्ञा
मुख्यमंत्री ने कहा कि नदियों के संरक्षण के प्रति राज्यभर में चेतना फैलाने के लिए आगामी 2 अक्टूबर को प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्रामसभाएं बुलाकर जल और नदियों के संरक्षण की प्रतिज्ञा दिलवाई जाएगी।
एमजेएसए पूरे देश के लिए अनुकरणीय - सद्गुरु
सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने कहा कि राजस्थान में जल संरक्षण के लिए जो कार्य हुआ है वह पूरे भारत में कहीं और नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि इस पुनीत कार्य को और आगे बढ़ाने की जरूरत है ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियों को जल संकट का सामना नहीं करना पड़े। यह काम अभी शुरू नहीं किया गया तो आने वाले 25 साल के बाद हमारी नदियों में पानी नहीं बचेगा।
मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे के विजन की प्रशंसा करते हुए सद्गुरु ने कहा कि सभी सरकारों और आमजन को नदियों को बचाने की दिशा में कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि नदियों को बचाने की यह पहल राजनीति से परे है और केन्द्र सरकार तथा सभी राज्य सरकारें आगे बढ़कर इसका समर्थन कर रही हैं।
श्रीमती राजे ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रदेश के तीन सरपंचों श्री भंवरलाल पटेल, श्रीमती गुड्डू बाई तथा श्रीमती कांता ननोमा को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। साथ ही जल संरक्षण विषयों पर आयोजित प्रतियोगिताओं में विजेता रहने वाले छात्र-छात्राओं को भी पुरस्कृत किया। कार्यक्रम में सेंड आर्टिस्ट श्री बादल बराय ने मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के महत्व को खूबसूरत अंदाज में प्रस्तुत किया।
पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री राजेन्द्र राठौड़ ने इस अवसर पर कहा कि प्रदेश में शुरू किए मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के सारगर्भित परिणाम सामने आने लगे हैं। उन्होंने कहा कि लुप्त होती नदियों को बचाने का अभियान भी सबके लिए प्रेरणादायी रहेगा।
इस अवसर पर राज्य मंत्रिमण्डल के सदस्यगण, राजस्थान रिवर बेसिन अथॉरिटी के चेयरमैन श्री श्रीराम वेदिरे, मुख्य सचिव श्री अशोक जैन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।
Subscribe to:
Posts (Atom)