Monday, 2 October 2017

भारत के राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविन्द जी का मंगरोल में विभिन्न योजनाओं के उद्घाटन/शिलान्यास करने के अवसर पर सम्बोधन


आज गाँधी जयंती के पावन अवसर पर मुझे प्रात:काल बापू की समाधि पर जाकर श्रद्धा सुमन अर्पित करने का और उसके बाद उनके जन्मस्थान पोरबंदर में कीर्ति मंदिर जाकर नमन करने का सौभाग्य मिला। और यहाँ का कार्यक्रम भी बापू की स्मृति और आदर्शों से जुड़ा हुआ है।

जैसा कि हम सभी जानते है बापू पूरे समाज का समग्र विकास चाहते थे। वे श्रम की गरिमा में विश्वास करते थे। यहाँ आज जिन सुविधाओं की शुरुआत की गयी है उनसे यहाँ के मेहनतकश लोगों का आर्थिक विकास होगा और उनके जीवन स्तर में सुधार होगा।

समुद्र तट पर रहने वाले सौराष्ट्र के लोग खारे पानी तथा प्रकृति की अन्य चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी मेहनत से अपने जीवन का निर्माण करते हैं। यहाँ के लोग अपने परिश्रम और पुरुषार्थ के लिए जाने जाते हैं। इस प्रकार इस क्षेत्र के लोग गुजरात की उद्यमशीलता का प्रतिनिधित्व करते हैं।

हम सब गुजराती भाई-बहनों के लिए अक्तूबर का मास बहुत ही महत्वपूर्ण महीना है। आज के दिन, पूरे विश्व में अपनी कीर्ति फैलाने वाले महात्मा गांधी का जन्म इसी राज्य में हुआ था। 15 दिन बाद ही गुजराती नूतन वर्ष का आगमन होगा जब पूरे देश में दीवाली का त्योहार मनाया जाएगा। आप सभी को गुजराती नूतन वर्ष और दीवाली की अग्रिम शुभकामनाएं।

31 अक्तूबर को हमारे देश के वर्तमान स्वरूप को सुनिश्चित करने वाले लौह पुरुष सरदार पटेल की जयंती हम सब मनाते हैं। भारत की आजादी के निर्णय के समय लगभग चालीस प्रतिशत क्षेत्र 550 से अधिक रजवाड़ों के अधीन था। इन सभी रजवाड़ों का भारत में विलय सरदार पटेल के ही अथक प्रयास से हुआ था। तब के जूनागढ़ रियासत के इस क्षेत्र का भारत के संघ में विलय भी सरदार पटेल की अद्भुत क्षमताओं के कारण ही संभव हो सका था। देश को वर्तमान स्वरुप प्रदान करने के लिए पूरा भारत उनका ऋणी है। हम पूरी श्रद्धा से उनको नमन करते है।

गुजरात में मैंने यहाँ की उस विशेष ऊर्जा का अनुभव किया है जो गुजरात के किसानो, उद्यमियों और सभी नागरिको में देखने को मिलती है। इसी विशेष ऊर्जा के कारण गुजरात विकास के अनेक पैमानों पर देश में अपना विशेष स्थान रखता है। कृषि, उद्योग, शिक्षा, कला, साहित्य, राजनीति आदि अनेक क्षेत्रों में गुजरात ने देश का गौरव बढ़ाया है।

कोस्टल गुजरात ने प्राचीन काल से ही देश के विकास में अपना योगदान दिया है। देश के बंदरगाहों से होने वाले कुल आवागमन का लगभग 48 प्रतिशत गुजरात के बंदरगाहों से ही होता है। यह गुजरात के लिए गर्व की बात है। प्राचीन काल से ही विख्यात कांडला के बड़े बंदरगाह के अलावा गुजरात में 40 से अधिक बंदरगाह हैं।

समुद्री मछलियों के कारोबार में गुजरात का देश में पहला स्थान है और इस कारोबार में पूरे देश का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा कोस्टल गुजरात से आता है। फिशिंग हार्बर्स और फिश लैंडिंग सेंटर्स का निर्माण तथा पुराने हार्बर्स और लैंडिंग सेंटर्स को नए तरीके से विकसित करके गुजरात के इस कारोबार को और अधिक बढाया जा सकता है। इसीलिए जिन योजनाओं की आज यहाँ शुरूआत की गई है उनसे यहाँ की अर्थवयवस्था को फायदा होगा और लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा। यूरोपियन यूनियन के मानकों के स्तर पर पहुँचने के प्रयास में यह योजनाएं सहायक सिद्ध होंगी।

तत्कालीन मुख्यमंत्री तथा आज के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सपनों को साकार रूप देने की दिशा में मुख्यमंत्री रूपाणीजी ने अथक प्रयास किया है और इन योजनाओं को ठोस रूप दिया है। उदाहरण के लिए, मंगरोल के तीसरे चरण की जिस योजना का आज शिलान्यास किया गया है उससे यहाँ की बर्थिंग और लैंडिंग क्षमता में तीन गुने से भी अधिक का इजाफा होगा। आज यहाँ 400 नौकाओं को बर्थिंग और लैंडिंग सुविधा प्रदान करने की क्षमता है, जिसे बढाकर 1400 नौकाओं को यह सुविधाएँ दी जा सकेगी।

इन सभी योजनाओं के विस्तार में जाने पर उनके व्यापक और दूरगामी फायदे स्पष्ट हो जाते हैं। आज शुरू की गयी योजनाओं के कारण, यहाँ के मछुआरे बंधुओं के लिए आज का दिन ऐतिहासिक सिद्ध होगा, ऐसा मेरा विश्वास है। इस क्षेत्र के 45 गांवों में पानी की आपूर्ति को बेहतर बनाने की अत्यंत महत्वपूर्ण योजना का शुभारंभ करके मुझे हार्दिक प्रसन्नता हुई है।

इस क्षेत्र की जनता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण इन योजनाओं के लिए मैं राज्य सरकार को, गुजरात की जनता को और खासकर सौराष्ट्र के लोगों को बधाई देता हूँ।

अंत में, मैं राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की पुण्य स्मृति में आप सब के साथ एक कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से बापू को सादर नमन करता हूँ।

धन्यवाद

जय हिन्द!

(Release ID 67431)

Sunday, 1 October 2017

2011 में ही शुरू कर दिया था राजस्थान में जल संरक्षण का कार्य - मुख्यमंत्री| राजस्थान जल संरक्षण में पूरे देश में आगे -सद्गुरु जग्गी वासुदेव


मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने कहा कि प्रदेश में जल संकट को देखतेे हुए 2011 में ही जल संरक्षण का काम शुरू कर दिया था, जबकि उस समय प्रदेश में हमारी सरकार नहीं थी। उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहते हुए उन्होंने राजस्थान को जल संकट से निजात दिलाने के लिए प्रयास इसलिए शुरू कर दिए थे क्योंकि यह वोटों का नहीं लोगों की जिन्दगी के सवाल का विषय था। 

श्रीमती राजे सीतापुरा स्थित जेईसीसी में गुरुवार को आयोजित नदी अभियान ’रैली फॉर रिवर्स’ में उपस्थित लोगों को सम्बोधित कर रही थीं। 

एमजेएसए को बनाया जन अभियान
श्रीमती राजे ने कहा कि राजस्थान में सबसे बड़ा संकट पानी का है। हमने राजस्थान को पानी के संकट से मुक्ति दिलाने का सपना पूरा करने के लिए हमारी सरकार बनते ही ‘राजस्थान रिवर बेसिन अथॉरिटी’ का गठन किया ताकि राजस्थान की नदियों को जोड़ने का काम शुरू कर सकें। उसके बाद प्रदेशभर में मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि एमजेएसए को जन अभियान बनाते हुए हमने समाज के हर वर्ग को इससे जोड़ा। वर्षा जल के संरक्षण के लिए दो साल में करीब ढाई लाख स्ट्रक्चर बनाए जो पानी से लबालब भर गए हैं। इस साल भी करीब 1 लाख जल संरचनाएं बनाई जाएंगी और उम्मीद है कि अगली बारिश में वे भी लबालब भर जाएंगी। हमारा सपना पूरा होगा और राजस्थान जल्द ही पानी के मामले में आत्मनिर्भर बन जाएगा। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि सद्गुरु श्री जग्गी वासुदेव की रैली फॉर रिवर्स यात्रा आज जब राजस्थान से गुजरी है तो एमजेएसए अभियान को भी छूकर जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे जल संरक्षण के हमारे प्रयासों को भी एक नई ऊर्जा मिलेगी। 

दूर होगा जल संकट 
श्रीमती राजे ने कहा कि आने वाले समय में राजस्थान के लोगों को जल संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कालीसिंध, मेज, चाकन, बनास, गम्भीर तथा पार्वती नदियों के व्यर्थ बहने वाले बरसाती पानी की बूंद-बूंद को बचाने के लिए राज्य सरकार 40 हजार करोड़ रुपये के ’ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट’ पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से 13 जिलों को पेयजल आपूर्ति हो सकेगी। उन्होंने कहा कि राज्य में ब्राह्मणी-बनास इंटरलिंक प्रोजेक्ट पर भी काम किया जा रहा है जिससे ब्राह्मणी नदी के अतिरिक्त पानी को बीसलपुर में डाल कर पेयजल की मांग पूरी की जाएगी। इसके अलावा लुप्तप्राय सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने की सम्भावनाओं पर भी काम किया जा रहा है।

नदियों के संरक्षण के लिए दिलाई जाएगी प्रतिज्ञा
मुख्यमंत्री ने कहा कि नदियों के संरक्षण के प्रति राज्यभर में चेतना फैलाने के लिए आगामी 2 अक्टूबर को प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्रामसभाएं बुलाकर जल और नदियों के संरक्षण की प्रतिज्ञा दिलवाई जाएगी।

एमजेएसए पूरे देश के लिए अनुकरणीय - सद्गुरु
सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने कहा कि राजस्थान में जल संरक्षण के लिए जो कार्य हुआ है वह पूरे भारत में कहीं और नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि इस पुनीत कार्य को और आगे बढ़ाने की जरूरत है ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियों को जल संकट का सामना नहीं करना पड़े। यह काम अभी शुरू नहीं किया गया तो आने वाले 25 साल के बाद हमारी नदियों में पानी नहीं बचेगा। 

मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे के विजन की प्रशंसा करते हुए सद्गुरु ने कहा कि सभी सरकारों और आमजन को नदियों को बचाने की दिशा में कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि नदियों को बचाने की यह पहल राजनीति से परे है और केन्द्र सरकार तथा सभी राज्य सरकारें आगे बढ़कर इसका समर्थन कर रही हैं।

श्रीमती राजे ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रदेश के तीन सरपंचों श्री भंवरलाल पटेल, श्रीमती गुड्डू बाई तथा श्रीमती कांता ननोमा को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। साथ ही जल संरक्षण विषयों पर आयोजित प्रतियोगिताओं में विजेता रहने वाले छात्र-छात्राओं को भी पुरस्कृत किया। कार्यक्रम में सेंड आर्टिस्ट श्री बादल बराय ने मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के महत्व को खूबसूरत अंदाज में प्रस्तुत किया। 

पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री राजेन्द्र राठौड़ ने इस अवसर पर कहा कि प्रदेश में शुरू किए मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के सारगर्भित परिणाम सामने आने लगे हैं। उन्होंने कहा कि लुप्त होती नदियों को बचाने का अभियान भी सबके लिए प्रेरणादायी रहेगा।

इस अवसर पर राज्य मंत्रिमण्डल के सदस्यगण, राजस्थान रिवर बेसिन अथॉरिटी के चेयरमैन श्री श्रीराम वेदिरे, मुख्य सचिव श्री अशोक जैन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

राजस्थान जल संरक्षण में पूरे देश में आगे -सद्गुरु जग्गी वासुदेव


2011 में ही शुरू कर दिया था राजस्थान में जल संरक्षण का कार्य - मुख्यमंत्री 



2011 में ही शुरू कर दिया था राजस्थान में जल संरक्षण का कार्य - मुख्यमंत्री  राजस्थान जल संरक्षण में पूरे देश में आगे -सद्गुरु जग्गी वासुदेव2011 में ही शुरू कर दिया था राजस्थान में जल संरक्षण का कार्य - मुख्यमंत्री  राजस्थान जल संरक्षण में पूरे देश में आगे -सद्गुरु जग्गी वासुदेव2011 में ही शुरू कर दिया था राजस्थान में जल संरक्षण का कार्य - मुख्यमंत्री  राजस्थान जल संरक्षण में पूरे देश में आगे -सद्गुरु जग्गी वासुदेव


जयपुर, 28 सितम्बर। मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने कहा कि प्रदेश में जल संकट को देखतेे हुए 2011 में ही जल संरक्षण का काम शुरू कर दिया था, जबकि उस समय प्रदेश में हमारी सरकार नहीं थी। उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहते हुए उन्होंने राजस्थान को जल संकट से निजात दिलाने के लिए प्रयास इसलिए शुरू कर दिए थे क्योंकि यह वोटों का नहीं लोगों की जिन्दगी के सवाल का विषय था। 

श्रीमती राजे सीतापुरा स्थित जेईसीसी में गुरुवार को आयोजित नदी अभियान ’रैली फॉर रिवर्स’ में उपस्थित लोगों को सम्बोधित कर रही थीं। 

एमजेएसए को बनाया जन अभियान
श्रीमती राजे ने कहा कि राजस्थान में सबसे बड़ा संकट पानी का है। हमने राजस्थान को पानी के संकट से मुक्ति दिलाने का सपना पूरा करने के लिए हमारी सरकार बनते ही ‘राजस्थान रिवर बेसिन अथॉरिटी’ का गठन किया ताकि राजस्थान की नदियों को जोड़ने का काम शुरू कर सकें। उसके बाद प्रदेशभर में मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि एमजेएसए को जन अभियान बनाते हुए हमने समाज के हर वर्ग को इससे जोड़ा। वर्षा जल के संरक्षण के लिए दो साल में करीब ढाई लाख स्ट्रक्चर बनाए जो पानी से लबालब भर गए हैं। इस साल भी करीब 1 लाख जल संरचनाएं बनाई जाएंगी और उम्मीद है कि अगली बारिश में वे भी लबालब भर जाएंगी। हमारा सपना पूरा होगा और राजस्थान जल्द ही पानी के मामले में आत्मनिर्भर बन जाएगा। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि सद्गुरु श्री जग्गी वासुदेव की रैली फॉर रिवर्स यात्रा आज जब राजस्थान से गुजरी है तो एमजेएसए अभियान को भी छूकर जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे जल संरक्षण के हमारे प्रयासों को भी एक नई ऊर्जा मिलेगी। 

दूर होगा जल संकट 
श्रीमती राजे ने कहा कि आने वाले समय में राजस्थान के लोगों को जल संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कालीसिंध, मेज, चाकन, बनास, गम्भीर तथा पार्वती नदियों के व्यर्थ बहने वाले बरसाती पानी की बूंद-बूंद को बचाने के लिए राज्य सरकार 40 हजार करोड़ रुपये के ’ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट’ पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से 13 जिलों को पेयजल आपूर्ति हो सकेगी। उन्होंने कहा कि राज्य में ब्राह्मणी-बनास इंटरलिंक प्रोजेक्ट पर भी काम किया जा रहा है जिससे ब्राह्मणी नदी के अतिरिक्त पानी को बीसलपुर में डाल कर पेयजल की मांग पूरी की जाएगी। इसके अलावा लुप्तप्राय सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने की सम्भावनाओं पर भी काम किया जा रहा है।

नदियों के संरक्षण के लिए दिलाई जाएगी प्रतिज्ञा
मुख्यमंत्री ने कहा कि नदियों के संरक्षण के प्रति राज्यभर में चेतना फैलाने के लिए आगामी 2 अक्टूबर को प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्रामसभाएं बुलाकर जल और नदियों के संरक्षण की प्रतिज्ञा दिलवाई जाएगी।

एमजेएसए पूरे देश के लिए अनुकरणीय - सद्गुरु
सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने कहा कि राजस्थान में जल संरक्षण के लिए जो कार्य हुआ है वह पूरे भारत में कहीं और नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि इस पुनीत कार्य को और आगे बढ़ाने की जरूरत है ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियों को जल संकट का सामना नहीं करना पड़े। यह काम अभी शुरू नहीं किया गया तो आने वाले 25 साल के बाद हमारी नदियों में पानी नहीं बचेगा। 

मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे के विजन की प्रशंसा करते हुए सद्गुरु ने कहा कि सभी सरकारों और आमजन को नदियों को बचाने की दिशा में कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि नदियों को बचाने की यह पहल राजनीति से परे है और केन्द्र सरकार तथा सभी राज्य सरकारें आगे बढ़कर इसका समर्थन कर रही हैं।

श्रीमती राजे ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रदेश के तीन सरपंचों श्री भंवरलाल पटेल, श्रीमती गुड्डू बाई तथा श्रीमती कांता ननोमा को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। साथ ही जल संरक्षण विषयों पर आयोजित प्रतियोगिताओं में विजेता रहने वाले छात्र-छात्राओं को भी पुरस्कृत किया। कार्यक्रम में सेंड आर्टिस्ट श्री बादल बराय ने मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के महत्व को खूबसूरत अंदाज में प्रस्तुत किया। 

पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री राजेन्द्र राठौड़ ने इस अवसर पर कहा कि प्रदेश में शुरू किए मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के सारगर्भित परिणाम सामने आने लगे हैं। उन्होंने कहा कि लुप्त होती नदियों को बचाने का अभियान भी सबके लिए प्रेरणादायी रहेगा।

इस अवसर पर राज्य मंत्रिमण्डल के सदस्यगण, राजस्थान रिवर बेसिन अथॉरिटी के चेयरमैन श्री श्रीराम वेदिरे, मुख्य सचिव श्री अशोक जैन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे। 

Friday, 29 September 2017

महावीर कुमार सोनी ने "महान वीरांगना अबक्का रानी" पुस्तक की प्रति मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जी को भेंट की, मुख्यमंत्री ने वाह कहते हुए की सराहना

लेखक एवं पत्रकार ज्योतिर्विद महावीर कुमार सोनी ने हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र द्वारा प्रकाशित उनकी पुस्तक "देश की प्रथम महिला स्वतंत्रता सैनानी महान वीरांगना अबक्का रानी" की प्रति प्रदेश की लोकप्रिय मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जी को भेंट की। सोनी ने मुख्यमंत्री को बताया कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में यह विशेष उदाहरण सामने आया है, जिसमें देश की प्रथम महिला स्वतंत्रता सैनानी महान वीरांगना अबक्का रानी थी। मुख्यमंत्री ऐसी जानकारी लिए हुए पुस्तक को देखकर अत्यन्त हर्षित हुई और इस हेतु उन्होंने सराहना की। मुख्यमंत्री की ज्योतिर्विद महावीर सोनी को प्रत्यक्ष में यह तीसरी बार की गई सराहना है, इस प्रकार के रचनात्मक या सामाजिक कार्यों पर मुख्यमंत्री ने सदैव सराहना की है, जिससे इस प्रकार के कार्यों में अपार उत्साह वृद्धि के साथ निरंतर गति बनी है






Saturday, 9 September 2017

शिक्षा राज्यमंत्री श्री देवनानी ने हमीरा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में नव निर्मित भवनों का किया लोकार्पण

शिक्षा राज्यमंत्री श्री वासुदेव देवनानी नें शनिवार को ग्रामपंचायत हमीरा में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में रमसा के तहत विद्यालय सुदृढी़करण योजनान्तर्गत नवनिर्मित कक्षा-कक्षों का लोकार्पण  किया। इस दौरान बाड़मेर सांसद कर्नल सोनाराम चौधरी ,जैसलमेर विधायक छोटूसिंह भाटी , पोकरण विधायक शैतानसिंह राठौड़ , जिला प्रमुख श्रीमती अंजना मेघवाल, और सरपंच, ग्राम पंचायत हमीरा आनन्दसिंह उपस्थित थे।

शिक्षा राज्यमंत्री श्री देवनानी ने हमीरा उच्च माध्यमिक विद्यालय में 50 लाख 42 हजार रुपये की लागत से नवनिर्मित कक्षा कक्ष ,पुस्तकालय ,कम्प्यूटर कक्ष इत्यादि का लोकार्पण कर विद्यालय के लिए समर्पित किया। इस दौरान जिला शिक्षाधिकारी माध्यमिक मन्नीराम मीणा ,अतिरिक्त जिला शिक्षाधिकारी कमल किशोर व्यास ,प्राचार्य मनीष कुमार दवे के साथ ही ग्रामीणजन एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

स्वास्थ्य में ई-गवनेर्ंस के क्षेत्र में राजस्थान देश में प्रथम

स्वास्थ्य के क्षेत्र में ई-गवनेर्ंस के लिये राजस्थान को सर्वश्रेष्ठ होने का अवार्ड मिलने के साथ ही कुल 9 स्काच अवार्ड प्रदान किये गये हैं। नयी दिल्ली में आयोजित 49वीं स्काच समिट में राजस्थान को दो दिनों में यह अवार्ड्स दिये गये हैं। इनमें पांच आर्डर आफ मेरिट, तीन प्लेटीनम एवं एक सिल्वर अवार्ड शामिल है।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री कालीचरण सराफ ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत विभिन्न परियोजनाओं में लिये गये ई-इनीशियेटिव के लिये एनएचएम राजस्थान टीम को बधाई दी है। उन्होंने बताया कि इन ई-इनीशियेटिव से प्रदेश की स्वास्थ्य योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में सहयोग मिल रहा है। 

प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती वीनू गुप्ता ने बताया कि स्काच अवार्ड हेतु राजस्थान की पांच स्वास्थ्य परियोजनाओं का नामिनेशन किया गया था और इन पांचों ही परियोजनाओं को स्काच अवार्ड प्राप्त हुआ है। इनमें सी-मेम, आंचल मदर मिल्क बैंक, आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, आशा द्वारा टीबी स्क्रीनिंग एवं आरबीएसके साफ्टवेयर को स्काच आर्डर आफ मेरिट अवार्ड मिले हैं।

स्वास्थ्य सचिव एवं मिशन निदेशक एनएचएम श्री नवीन जैन ने बताया कि राजस्थान को स्वास्थ्य के क्षेत्र में ई-गवनेर्ंस के लिये श्रेष्ठ राज्य के पुरस्कार के साथ ही तीन प्लेटीनम अवार्ड एवं पांच स्काच आर्डर आफ मेरिट अवार्ड प्राप्त हुये हैं। उन्होंने बताया कि राजस्थान की बच्चों के कुपोषण को दूर करने के लिये समुदाय आधारित योजना सी-मेम एवं मदर मिल्क बैंक के साथ ही एनएचएम राजस्थान को श्रेष्ठता के लिये स्काच प्लेटीनम पुरस्कार दिया गया है। इसी प्रकार आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र परियोजना को भी स्काच सिल्वर अवार्ड प्रदान किये गये हैं।

श्रीमती राजे को मिला ’बेस्ट चीफ मिनिस्टर ऑफ द ईयर’ का स्कॉच अवार्ड

 श्रीमती वसुन्धरा राजे को गुड गवनेर्ंस, सूचना प्रौद्योगिकी, कौशल विकास तथा महिला स्वावलम्बन जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य एवं उपलब्धियों और राजस्थान को बीमारू प्रदेशों की श्रेणी से बाहर लाने के लिए ’बेस्ट चीफ मिनिस्टर ऑफ द ईयर’ स्कॉच अवार्ड से सम्मानित किया गया। वहीं साथ ही राजस्थान को ’स्टेट ऑफ द ईयर’ अवार्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया है।

मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में राजस्थान विधानसभा के उपाध्यक्ष श्री राव राजेन्द्र सिंह ने शनिवार को नई दिल्ली में कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में स्कॉच ग्रुप द्वारा आयोजित समारोह में यह अवार्ड ग्रहण किए। समारोह में राजस्थान को विभिन्न श्रेणियों में कुल 57 अवार्ड दिए गए। समारोह के मुख्य अतिथि केन्द्रीय पर्यटन तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री श्री केजे अल्फोंस थे।

अवार्ड समारोह में श्री राव राजेन्द्र सिंह ने कहा कि भौगोलिक दृष्टि से देश का सबसे बड़ा और रेगिस्तानी प्रदेश होने के कारण राजस्थान में विकास की चुनौतियां अन्य प्रदेशों की तुलना में बहुत बड़ी हैं। इसके बावजूद मुख्यमंत्री की दृढ़ इच्छाशक्ति, कड़े परिश्रम और कुशल नेतृत्व के फलस्वरूप राजस्थान में सुराज लाने का विजन मूर्त रूप ले रहा है। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में आगे बढ़कर राजस्थान बीमारू राज्य की श्रेणी से बाहर आया है। 

समारोह में राजस्थान के श्रम, रोजगार और कौशल विकास आयुक्त श्री कृष्ण कुणाल सहित अन्य अधिकारियों ने भी अवार्ड ग्रहण किए।