Wednesday, 17 August 2016

मुख्यमंत्री का राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में सम्बोधन सशक्त, समृद्ध और खुशहाल राजस्थान के निर्माण में भागीदारी के आह्वान के साथ विकास की कई घोषणाएं

जयपुर, 15 अगस्त। मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने अजमेर के पटेल मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में देश के शहीदों एवं स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करते हुए सशक्तसमृद्ध और खुशहाल राजस्थान के निर्माण में युवा शक्ति एवं प्रदेशवासियों से भागीदार बनने का आह्वान किया। श्रीमती राजे ने कहा कि आज देश में युवाओं की संख्या65 प्रतिशत है। हमें जोश और जज्बे को बरकरार रखते हुए आजादी के मूल मंत्र को हमेशा याद रखना होगा। 


2 अक्टूबर से लगेंगे पंचायत शिविर        
  मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पहली बार पंचायत से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए पंचायत स्तर पर ही शिविर लगाकर जन समस्याओं के निराकरण की अभिनव पहल की जाएगी। पूरे प्रदेश में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर के अवसर पर ये शिविर शुरू होंगे।


    किसानों को 1500 करोड़ का अतिरिक्त ब्याज मुक्त फसली ऋण

   मुख्यमंत्री ने कहा कि फसली ऋण योजना के तहत किसानों को सहकारी बैंकों के माध्यम से 1500 करोड़ रुपए का अतिरिक्त ब्याज मुक्त फसली ऋण उपलब्ध करवाया जाएगा। उन्होंने समारोह में इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि किसानों की 5 हैक्टेयर तक की खातेदारी भूमि से जिप्सम की परत हटाने का परमिट अब जिला कलक्टर के स्तर पर ही जारी कर दिए जाएंगे। इससे भूमि की उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों को भरपूर लाभ मिलेगा। 

40 हजार महिलाओं को आजीविका तथा मनरेगा से जोड़ेंगे        
  मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए उन्हें आजीविका से जोड़ा जाएगा। इस साल हम 40 हजार ऎसी महिलाओं को राजस्थान आजीविका परियोजना तथा मनरेगा से जोड़ेंगेजिससे ये महिलाएं न केवल अपने खेतों में खेत-तलाईभूमि समतलीकरण और मेड़बंदी का कार्य करा सकेंगी बल्कि वर्मी-कम्पोस्ट के उत्पादन के साथ-साथ बकरी और पशु के लिए शैड का निर्माण भी कर सकेंगी।
एससी-एसटी को पात्रता अंकों में 5 प्रतिशत की छूट          
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य मेें मंत्रालयिक सेवा संबंधी तीनों नियमों जैसे राजस्थान सचिवालय, राजस्थान लोक सेवा आयोग एवं राजस्थान अधीनस्थ कार्यालय लिपिकवर्गीय सेवा नियम, 1999 में नया प्रावधान किया जाएगा। इनमें सीधी भर्ती के पदों पर एससी-एसटी के अभ्यर्थियों को प्रथम चरण व द्वितीय चरण की परीक्षा में न्यूनतम पात्रता अंकों में 5 प्रतिशत तक की छूट देय होगी। इससे अधिक लोगों को आरक्षित पदों पर चयन का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों की सुविधा के लिए ऑनलाइन पेंशन सॉफ्टवेयर को शीघ्र ही लागू किया जाएगा।
विद्यार्थी मित्रों को राहत के लिए करेंगे सार्थक पहल       
   श्रीमती राजे ने कहा कि लम्बे समय से विद्यार्थी मित्र की समस्या के समाधान करने की मांग की जा रही है। हमने इसके समाधान का प्रयास भी किया परन्तु समस्त प्रक्रिया न्यायालय में विचाराधीन होने से लंबित है। अब नए सिरे से इसके समाधान का प्रयास किया जा रहा है। आगामी एक-दो माह में  इस दिशा में सार्थक पहल करने का प्रयास किया जा रहा है। 

  350 स्कूलों में होेंगे 204 करोड़ के काम        
  
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से पिछले ढाई सालों में शिक्षा की गुणवत्ता में निरन्तर सुधार हुआ है। इसी का परिणाम है कि वर्ष 2013 की तुलना में वर्ष 2016 में रिजल्ट 56 से बढ़कर 70 प्रतिशत हो गया है। बारहवीं विज्ञान संकाय का रिजल्ट 34 से बढ़कर 47 प्रतिशत हो गया है तथा लाख बच्चों का नामांकन बढ़ा हैजो एक रिकॉर्ड है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अन्तर्गत 204करोड़ रुपये की लागत से 350 विद्यालयों में हजार से अधिक कार्य कराये जाएंगे। इनमें विज्ञान प्रयोगशालाकम्प्यूटर रूमआर्ट एण्ड क्राफ्ट रूमपुस्तकालयअतिरिक्त कक्षा-कक्ष एवं पेयजल सुविधाओं के कार्य होंगे।

  शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए 12 केन्द्र          
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों के आधुनिक प्रशिक्षण के लिए 9 शैक्षणिक संभाग मुख्यालय सहित 12 स्थानों पर स्थित स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ एजूकेशन मैनेजमेंट एण्ड ट्रेनिंग में अत्याधुनिक आईटी सुविधाओं से युक्त केन्द्राें का निर्माण कराया जाएगा। 

संभाग मुख्यालयों पर स्थापित होंगे ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर     

     श्रीमती राजे ने युवाओं को कौशल विकास से जोड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि हमने इस दिशा में ठोस कदम उठाये और राजस्थान मिशन ऑन लाइवलीहुड का पुनर्गठन किया। आज प्रदेश के सैकेण्डरी स्कूलों में भी व्यावसायिक शिक्षा प्रदान की जा रही है। राज्य का ऎसा कोई जिला नहीं है, जहां किसी बड़ी कम्पनी की आईटीआई से पार्टनरशिप न हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले दो-तीन माह में सीकर और रेलमगरा के साथ-साथ सभी संभाग मुख्यालयों पर ड्राइविंग ट्रेनिंग सेन्टर स्थापित किए जाएंगे। नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एन्टरप्रेन्योरशिप एण्ड स्मॉल बिजनेस डवलपमेंट की इकाइयां प्रदेश की सभी सरकारी आईटीआई में 13 दिसम्बर तक स्थापित कर दी जाएंगी। राज्य में कौशल प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में अगस्त माह के दौरान करीब 21 हजार प्रशिक्षणार्थी नामांकित थे, जो कि एक रिकॉर्ड है। साथ ही सरकार ने अब तक सरकारी एवं गैर सरकारी क्षेत्रों में 9 लाख 90 हजार रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए हैं। 104 या 108 डायल करने पर मिलेगी एम्बूलेंस सेवाएं      
   मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में 108 एम्बूलेंस सेवा, 104 जननी एक्सप्रेस सेवा, बेस एम्बूलेंस सेवा तथा 104 चिकित्सा परामर्श सेवा पृथक्-पृथक् संचालित की जा रही हैं और इनकी सेवाओं के लिए कॉलर को अलग-अलग नम्बर डायल करने पड़ते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए इन चारों एम्बूलेंस सेवाओं को एकीकृत कर जीवनवाहिनी इंटीग्रेटेड एम्बूलेंस योजना शुरू की जाएगी। जिससे 104 या 108 डायल करने पर एम्बूलेंस उपलब्ध होगी। इसका फायदा यह होगा कि रेस्पोंस समय में कमी आने से मरीज तक जल्दी पहुंचा जा सकेगा। इस प्रणाली को आज से ही लागू किया जा रहा है। 

  295 आदर्श पीएचसी की शुरूआत    
   
   मुख्यमंत्री श्रीमती राजे ने इस अवसर पर 295 आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की शुरूआत करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह योजना महत्वपूर्ण है। वर्ष 2017 तक हम 900 पीएचसी को आदर्श बनाएंगे। इनमें एलोपैथिक, आयुर्वेद और योगा की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि चिकित्सालयों में अनुपयोगी पड़े उपकरणों की शीघ्र मरम्मत, इनका उपयोग सुनिश्चित करने के लिए पीएचसी से लेकर जिला अस्पतालों तक एक्विपमेंट्स मैंनेजमेंट एण्ड मैंटीनेंस सिस्टम की स्थापना की जा रही है।  
बिजली, पानी और सड़क को किया मजबूत          
श्रीमती राजे ने कहा कि बिजली, पानी और सड़क प्रदेश के विकास के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं। इन तीनों ही क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देते हुए राज्य सरकार ने बिजली के वार्षिक औसत बजट आवंटन में 192प्रतिशत, पेयजल में 87.55 प्रतिशत और सार्वजनिक निर्माण विभाग में 140.87 प्रतिशत की वृद्धि की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत शेष रही 1480 ढाणी व मजरों को जोड़ने के लिए 1612 करोड़ रुपए की लागत से 4293 किमी डामर सड़क बनाई जाएगी। साथ ही, अजमेर, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, करौली, कोटा, झालावाड़, जोधपुर, नागौर, अलवर, हनुमानगढ़ एवं बीकानेर जिले की 500 किमी ग्रामीण सड़कों को मुख्य जिला सड़क के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। इसके अलावा दूसरे चरण में 2 हजार पंचायतों में गौरव पथ बनाए जाएंगे।  
जयपुर में 500 करोड़ रुपए के सीवरेज के काम होंगे      
    मुख्यमंत्री ने कहा कि जयपुर शहर की घनी आबादी वाले क्षेत्र में सीवरेज लाइनें डालने के लिए आने वाले ढाई साल में 500 करोड़ रुपए के काम हाथ में लिए जाएंगे। 
अजमेर अब खुले में शौच से मुक्त        
  श्रीमती राजे ने समारोह में अजमेर जिले को खुले में शौच से मुक्त जिला घोषित करते हुए कहा कि जल्द ही पाली, चूरू, झुझुनूं और गंगानगर जिले भी इस श्रेणी में शामिल होंगे। अब तक प्रदेश में 2329 ग्राम पंचायतें खुले में शौच से मुक्त हो चुकी हैं। 
रोज 1065 युवाओं को मिल रहा रोजगार      

    मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में प्रतिदिन नई पेयजल परियोजनाओं पर 13 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। प्रतिदिन 125 हैक्टेयर से भी अधिक भूमि बूंद-बूंद और फव्वारा सिंचाई योजनाओं से जोड़ी जा रही है। प्रतिदिन 155 युवाओं का कौशल विकास हो रहा है। सरकारी अथवा गैर-सरकारी क्षेत्र में प्रतिदिन 1 हजार 65 युवाओं को रोजगार मिल रहा है और प्रतिदिन  2 हजार 940 युवा मुद्रा योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। इसके अलावा प्रतिदिन 90 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों का पंजीयन हो रहा है। प्रतिदिन 4 करोड़ 54 लाख रुपये सड़क निर्माण पर खर्च हो रहे हैं और करीब 14 किलोमीटर सड़क बन रही हैं।

Tuesday, 26 July 2016

मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे की दूरदर्शी सोच से राजस्थान पा रहा सुनहरे आयाम

सदियों से पानी की समस्या से जूझ रही मरुधरा राजस्थान के इतिहास में यह पहला मौका है जब बारिश का इतना बेसब्री से इंतजार हो रहा है जैसा पहले कभी नहीं रहा। अबकि बार पूरा का पूरा राजस्थान जैसे उठ खड़ा हुआ है वर्षाऋतु की जोरदार अगवानी में। हर तरफ उल्लास का माहौल पसरा हुआ है। पूरे उत्साह और उमंग के साथ राजस्थान प्रदेशवासी उत्सुक हैं बारिश के स्वागत में। प्रदेश का कोना-कोना इस बार पावस से खुशहाली पाने के स्वप्नों में रमा हुआ है। जन समुदाय अब अहर्निश इसी तीव्रतर प्रतीक्षा में है कि बारिश कब हो, और अर्से से प्यासी धरा सरसब्ज हो। बात मैदानी हिस्सों की हो, रेगिस्तानी इलाकों की, या फिर पहाड़ी क्षेत्रों की। राजस्थान भर की सरजमीं पूरे उत्साह से आतुर है पानी भरे बादलों से आलिंगन को। राजस्थान रच रहा अपूर्व इतिहास नदी-नालों, झील-तालाबों से लेकर कूओं-बावड़ियों और तमाम नए-पुराने जलाशयों का उछाह भी कोई कम नहीं। उछाले मारती यह आतुरता, उत्साह और उमंग हो भी क्यों न, इस बार राजस्थान ऎसा अपूर्व स्वर्णिम इतिहास रचने जा रहा है जो सदियों तक पानी की आत्मनिर्भरता का पैगाम गूंजाता रहेगा। प्रदेश सरकार की ओर से राजस्थान को पानी के मामले में हर दृष्टि से आत्मनिर्भर बनाने के महत्वाकांक्षी प्रयासों का साकार स्वरूप दिखा रहे मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान ने प्रदेश का कायाकल्प ही कर दिया है। जल समस्या होगी दूर समूचे राजस्थान में बरसाती जल के संग्रहण के लिए लाखों छोटी-बड़ी जल संरचनाओं का सृजन हुआ है, पुराने और परंपरागत जल स्रोतों को आबाद किया गया है। प्रदेश भर में पुख्ता इंतजामों के साथ पूरी दूरदर्शिता और उपयोगिता को ध्यान में रखकर ऎसा जबर्दस्त काम किया गया है कि वर्षा का जल स्थानीय स्तर पर अधिक से अधिक संग्रहित हो, जल भण्डार समृद्ध हों ताकि साल भर पानी की उपलब्धता बनी रहे और भूमिगत जलस्तर में उत्तरोत्तर अभिवृद्धि हो। इससे राजस्थान में पानी की समस्या पर काफी हद तक काबू पाया जा सकेगा। आने वाले समय में अभियान के शेष चरणों में सभी इलाकों में जल संरक्षण कार्य पूर्ण हो जाने के बाद राजस्थान जल संकट के कलंक से हमेशा-हमेशा के लिए मुक्त हो जाएगा। जन भागीदारी का रिकार्ड मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे द्वारा ऎतिहासिक एवं तीव्रतर विकास के साथ ही राजस्थान की देश व दुनिया में इन्द्रधनुषी विकासकारी पहचान बनाने की दिशा में किए जा रहे अनथक प्रयासों की श्रृंखला में यह बहुद्देश्यीय अभियान आशातीत सफलता पा चुका है। इस अभियान को लेकर प्रदेश भर के लोगों की उत्साही और स्वैच्छिक भागीदारी ने रिकार्ड कायम किया है। हालांकि अभियान के प्रथम चरण की पूर्णता का यह अंतिम सप्ताह चल रहा है लेकिन राज्य में लगभग सभी स्थानों पर इस अभियान के कार्यों ने पूर्णता पा ली है। भरने लगे हैं जल स्रोत प्रदेश में मानसून पूर्व की बारिश में कई स्थानों पर अभियान में निर्मित जल संरचनाओं में जल संग्रहण आरंभ हो चुका है। यह अभियान की अप्रत्याशित सफलता का शुभ संकेत है।  बरसात के बाद परम्परागत जलाशयों और अभियान की बदौलत सामने आए नवीन और जीर्णोद्धारित जलस्रोतों में संग्रहित होकर वर्ष भर संचित रहने वाली जलराशि ग्रामीणों, मवेशियों व वन्य जीवों सभी के लिए उपयोगी और जीवनदायी सिद्ध होगी। लोक जीवन में आएगा सतरंगी बदलाव इसके साथ ही हरित क्रान्ति का नया इतिहास भी आकार लेने लगेगा। पहाड़ों, घाटियों, मैदानों व मरुस्थलीय क्षेत्राें में हरियाली का विस्तार होगा, खेती-बाड़ी व बागवानी को सम्बल मिलेगा वहीं मत्स्य पालन व विकास के साथ ही जलीय जीवों की जिन्दगी को भी सुकून मिलेगा। प्रदेश में जल आधारित पर्यटन क्षेत्रों के संरक्षण और विकास को मजबूती मिलेगी तथा नवीन जल पर्यटन क्षेत्र विकसित होंगे जिनसे राजस्थान के पर्यटन विकास को सुनहरे आयाम प्राप्त हाेंंगे। 25 लाख पौधरोपण एक जुलाई से     जल संरक्षण गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के साथ ही साथ प्रदेश सरकार ने व्यापक स्तर पर पौधरोपण गतिविधियों को भी हाथ में लिया है। यह विशेष पौधारोपण अभियान मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के अन्तर्गत पूरे राजस्थान में चयनित सभी 3 हजार 500 गांवों में एक जुलाई से आरंभ होगा तथा इसमें 25 लाख पौधे लगाए जाएंगे। इसकी प्रदेश भर में पूरी तैयारी है। इससे प्रदेश में पानी व हरियाली तथा इससे संबंधित गतिविधियाें को व्यापकता के साथ मजबूती मिलेगी और लोक जीवन में सुनहरी आभा के साथ ही कई मामलों में आत्मनिर्भरता और तरक्की के साथ बदलाव का सुखद अहसास हो सकेगा। राजस्थान की इतनी बड़ी समस्या का खात्मा करने इतने कम समय में अपूर्व, ऎतिहासिक एवं सतरंगी उपलब्धियां दर्शाने वाला मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान देश भर में अपनी तरह का पहला दूरदर्शी और अनुकरणीय अभियान है जिसमें जन भागीदारी से जनता के लिए बुनियादी विकास की नींव मजबूत करने में सफलता प्राप्त हुई है। मुख्यमंत्री की सोच का कमाल इस अभियान के जरिये मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे की दूरगामी सोच ने जो करिश्मा कर दिखाया है वह अद्भुत और कमाल का ही है।  इस बार की बारिश  से प्रदेश बारहों मास सावन सा अहसास कराएगा, यह उम्मीद सभी को है।

Saturday, 23 July 2016

राजस्थान में मुख्यमंत्री का आधिकारिक मोबाइल एप लॉन्च



मुख्यमंत्री का आधिकारिक मोबाइल एप लॉन्च जयपुर, 23 जुलाई।  मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने शनिवार को होटल मेरियट में अपना आधिकारिक मोबाइल एप लॉन्च किया। इस एप के माध्यम से प्रदेशवासियों को राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों की ताजा जानकारी मिल सकेगी। ’वसुन्धरा राजे’ मोबाइल एप के माध्यम से आमजन मुख्यमंत्री के साथ सीधा संवाद भी कर सकेंगे और दस्तावेज या फोटो अपलोड कर सकेंगे। इस एप में इंटीग्रेटेड सर्विस डिलीवरी एवं शिकायत समाधान सिस्टम भी है। साथ ही, राज्य सरकार अन्य एप्स के लिंक एवं राजस्थान के विकास से जुड़े इंफोग्राफिक्स उपलब्ध हैं। इस एप के माध्यम से मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान में आर्थिक सहयोग किया जा सकता है। इस पर मुख्यमंत्री के भाषण, संदेश एवं साक्षात्कार भी उपलब्ध हैं।

  

Thursday, 9 June 2016

जल संकट निवारण एवं पर्यावरण कार्यक्रमों को कैसे मिले बड़ी गति, पर सुझावों को लेकर संगोष्ठी का आयोजन

धर्मशाला, शमशान घाट, होटल, गेस्ट हाउस, जैन मंदिर एवं विभिन्न सार्वजनिक भवन प्रबंधकों के नाम अपील - जल संरक्षण के क्षेत्र में समुचित प्रयासों हेतु आगे आएं, किये गए प्रयासों से अवगत कराएं

"जल एवं पर्यावरण सरंक्षण कार्यक्रमों को कैसे विशेष गति मिले"  विषय को लेकर आज यहाँ आइजेविसिका कार्यालय पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई। समग्र जैन महासभा एवं आईजेविसिका की ओर से आयोजित इस संगोष्ठी को संबोधित करते हुए इंटरनेशनल सेंटर फॉर ज्योतिष, वास्तु, स्पिरिचुअल एन्ड कल्चरल एक्टिविटीज ट्रस्ट के अध्यक्ष महावीर कुमार सोनी ने बताया कि उनके द्वारा समस्त मंदिर, धर्मशाला एवं इस प्रकार के विभिन्न सार्वजनिक भवनों के प्रबन्धकों से  अपील की गई थी कि ऐसे भवनों में उनके द्वारा थोड़े से प्रयास द्वारा ही भू गर्भ में वापस जल पहुंचे, को बड़ी गति दी जा सकती है, कारण कि इन सार्वजनिक भवनों में बड़ी संख्या में लोग नहाते हैं, नहाने के बाद वह पानी वापस भू गर्भ में जावे, इसकी प्राय:कर समुचित व्यवस्था नहीं है, इस हेतु पहल धर्मशाला, शमशान घाट, होटल, गेस्ट हाउस, जैन मंदिर (इन मंदिरों में अभिषेक करने वाले व्यक्ति प्राय:कर यहीं नहाकर अभिषेक, पूजा आदि करते है।) एवं विभिन्न सार्वजनिक भवनों से की जानी चाहिए, बार बार की अपील के बावजूद इस  संबध में समुचित प्रयास नहीं हुए हैं, लोगों में जितनी जागरूकता आनी चाहिए थी वह नहीं आई है, लोग आने वाले पेय जल संकट के प्रति गंभीर नहीं है, ऐसे सार्वजनिक भवनों में ही इस महती कार्य को ऐसे कितने भवन प्रबन्धकों द्वारा अमल में लाया जा चुका है, की जानकारी सोशल साइट्स आदि द्वारा भी उन्होंने कई बार चाही थी, ताकि ऐसे बड़े प्रयास करने वालों के नाम उजागर कर और उन्हें सम्मानित कर अन्य लोगों को इस हेतु प्रेरित किया जावे। इस पर गोष्ठी में उपस्थित सर्व श्री शान्ति लाल जी बागडिया एवं हरक चंद जी छाबड़ा ने बताया कि मधुवन जैन मंदिर में यह व्यवस्था कॉफी अरसे पूर्व लागू की जा चुकी है, त्रिवेणी स्थित जैन मंदिर में भी यह व्यवस्था काफी पूर्व स्थापित की जा चुकी है किन्तु व्यापक स्तर पर ऐसा नहीं हो रहा है इसका कारण इस कार्य में बड़ा खर्चा लगना है, भू गर्भ में पानी साफ होता हुआ पहुंचे ऐसी व्यवस्था स्थापित होने में लगभग 40 हजार रुपए लग सकते हैं। मंदिर के बाहर एवं कालोनियों में सघन वृक्षरोपण कार्यक्रमों हेतु भी धन एक बड़ी बाधा है। इस पर श्री सोनी ने सरकार के नाम अपील जारी कर कहा कि ऐसे बड़े कार्यक्रमों के लिए वो प्राथमिकता पूर्वक पहल करे, मंदिर एवं सार्वजनिक भवन प्रबंधको को इस महती कार्य के लिए उत्साहित करने हेतु या तो स्वयं धन उपलब्ध करावे या  जन प्रतिनिधि निधि से धन उपलब्ध कराने की व्यवस्था करे, उन्हें हर प्रकार से प्रोत्साहित करे तथा एक अन्य  विकल्प के रूप में इस हेतु कार्यक्रम आयोजित कर कार्यक्रम की अध्यक्षता करने वाले समाज के नेतागणों से भी सहयोग के लिए आव्हान करना चाहिए।
इस अवसर श्री सोनी ने यह भी कहा कि हम लोग जब चेतते हैं जब समस्या अपने अंतिम चरण में आ जाती है या भीषण रूप ले लेती है, पर्यावरण की तरफ बढ़ता हुआ संकट ऐसा ही संकट है जिस पर भी हर स्तर पर बड़ा प्रयास जरुरी हो गया है, पर्यावरण सरंक्षण को सबसे बड़ा कर्तव्य घोषित किया जाना चाहिए। सोनी ने प्रदूषण की गंभीरता को देखते हुए प्रथम प्रयास के रूप में उनका सुझाव है कि सार्वजनिक वाहन प्रणाली को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, इसमें जो खामियां है उन्हें दूर करे, सरकारी अधिकारी कर्मचारी, फैक्टरी, बड़े प्रतिष्ठानो में काम करने वाले लोग सार्वजनिक वाहनों में आने जाने के लिए  प्रोत्साहित हों, इस हेतु समुचित प्रयासों की आज तुरन्त आवश्यकता है। विभिन्न अधिकारी कर्मचारियों को सुबह और शाम में कार्यालय आने जाने के लिए एक कालोनी या स्थान विशेष से स्थान विशेष तक जाने के लिए कार्यालयों आदि में आने जाने हेतु एक ही वाहन या सार्वजनिक वाहन का उपयोग संबंधी व्यवस्था लागू कर प्रदूषण की समस्या पर कुछ अंश में तुरन्त कमी की जा सकती है।
 संगोष्ठी में समाज श्रेष्टि सर्व श्री राजेन्द्र पाल जी जैन, शान्ति लाल बागडिया, अनिल छाबड़ा, वाई के काला, हरक चंद छाबड़ा, ज्योतिर्विद् महावीर सोनी एवं सुरेखा सोनी सहित सभी ने अपने अपने सुझाव प्रस्तुत कर "जल एवं पर्यावरण कार्यक्रमों को कैसे बड़ी गति मिले" पर अपनी बात रखी। कार्यक्रम के अंत में भी सभी ने जल की एक एक बून्द बचाने के संकल्प पत्र पर लिखित में संकल्प लेकर अभियान को गति प्रदान की, ट्रस्ट द्वारा जारी स्वच्छ भारत अभियान के पोस्टर द्वारा भी देश को स्वच्छ बनाने की  दिशा  कार्य करने का संकल्प लिया. 
उल्लेखनीय है कि श्री महावीर कुमार सोनी द्वारा राज्य कर्मचारी संघ, युवा के अध्यक्ष के रूप में अप्रैल 2003 में "जल ही जीवन है - जल बचाओ महाअभियान" शुरू किया गया था जिसके तहत संघ द्वारा जारी संकल्प पत्र में जल की वास्तविक स्थिति का अति सुंदर एवं सरल भाषा में दिग्दर्शन कराते हुए जल की एक एक बून्द बचाने एवं दुरूपयोग होते हुए देखने पर उसे हर सम्भव उपाय द्वारा रोकने का संकल्प लिखित में करना, इस अभियान का मुख्य कार्य था, संकल्प पत्रों के द्वारा जल बचाने संबंधी इस अभियान की शुरुआत तत्कालीन जिला कलक्टर, जयपुर से संकल्प पत्र भरवा कर अप्रेल 2003 में शुरू हुआ था, कुछ वर्षों के उपरान्त तत्कालीन सम्भागीय आयुक्त के कर कमलों से संघ द्वारा "शुद्ध जल, शुद्ध पर्यावरण एवं सुरक्षित वातावरण हो पहला मानवाधिकार अभियान" भी इस संघ का ऐसे कार्यक्रमों में एक अभिनव प्रयास था।

Wednesday, 25 May 2016

डॉ महेश शर्मा ने खान अब्दुल गफ्फार खान की 125 वीं जयंती के उपलक्ष्य में 'सीमांत गांधी और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन' नामक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया

केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. महेश शर्मा ने खान अब्दुल गफ्फार खान की 125 वीं जयंती के उपलक्ष्य में संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित 'सीमांत गांधी और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलननामक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उन्होंने खान अब्दुल गफ्फार खान के वंशजों यानि उनकी प्रपौतियों सुश्री यास्मिन खान और सुश्री तनजीम खान तथा प्रपौत्र श्री दानिश खान को इस अवसर पर शॉल भेंट करके सम्मानित किया। एनएमएमएल के अध्यक्ष प्रो. लोकेश चंद्र तथा भारत में अफगानिस्तान के राजदूत श्री शैदा मोहम्मद अब्दाली और संस्कृति मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर मौजूद थे।


संस्कृति मंत्रालय 2015-16 के दौरान खान अब्दुल गफ्फार खान की 125 वीं जयंती मना रहा गया है। स्मरणोत्सव के अधीन गतिविधियों के एक हिस्से के रूप में नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालयनई दिल्ली ने इस प्रदर्शनी और कार्यक्रम का आयोजन किया है।


इस अवसर पर संबोधित करते हुए डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि खान अब्दुल गफ्फार खान एक महान व्यक्ति थे जो भारत की स्वतंत्रता और हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए समर्पित थे। आज यह एक महान क्षण है कि उनके परिवार के सदस्य इस समारोह में मौजूद हैं। खान अब्दुल गफ्फार खान और गांधी जी एक दूसरे के पूरक थे और हम उनकी यादों को आने वाले दशकों के लिए जिंदा रखेंगे।

उन्होंने कहा कि खान अब्दुल गफ्फार खान की 125 वीं जयंती उनके जीवन के बलिदानप्रतिबद्धता और उपलब्धियों के विशेष अन्वेषण का आह्वान करती है। उनका जीवन और संदेश भारत और समस्त मानवता के लिए प्रेरणा दायक रहे हैं। उन्होंने बेहतरीन पठान चरित्र को अपनाया जो उनके स्वतंत्रताभगवान में निहित विश्वासअदम्य साहसनिर्भीकता और निर्भयता के लिए उनके गहन जुनून से परिलक्षित होता है।

डॉ शर्मा ने कहा कि खान अब्दुल गफ्फार खान एक कट्टर राष्ट्रवादी और मूलतः बहुलवादी व्यक्ति थे। उन्होंने कभी भी दो राष्ट्र सिद्धांत को स्वीकार नहीं किया और भारत के विभाजन का जोरदार विरोध किया। उन्होंने एक राष्ट्र के रूप में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच एकता का समर्थन किया।

मंत्री महोदय ने कहा कि जब विभाजन की योजना के खिलाफ अनेक संवैधानिक फार्मूले असफल रहे और यह निर्णय लेने के लिए कि लोगों को कौन से देश में शामिल होना है एक जनमत संग्रह कराने की सिफारिश की गई थी। इस निर्णय से खान अब्दुल गफ्फार खान दंग रह गए थे। उन्होंने कहा था, "महात्माजीआपने हमें भेड़ियों के सामने फेंक दिया है"।

डॉ. शर्मा ने कहा कि खान अब्दुल गफ्फार खान को बादशाह खान या सीमांत गांधी के नाम से लोकप्रिय थे और वास्तव में से सच्चे प्रतिष्ठित नेताओं में से एक थे जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ एक बड़े संघर्ष में जनता का नेतृत्व किया। वह एक बहुत धार्मिक व्यक्तिप्रतिबद्ध समाज सुधारकपश्तो भाषा के भावुक समर्थकभारत की एकता में विश्वास करने वाले और इससे भी बढ़कर कट्टर गांधीवादी थे। उन्हें 1987 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

उन्होंने कहा कि खान अब्दुल गफ्फार खान एक सामाजिक-धार्मिक सुधारक थे इसलिए  उन्होंने यह महसूस किया कि उचित शिक्षा के अभाव में पख्तून भटक  जाते हैं। वे पख्तूनों की सभी जनजातियों को एकजुट करना, उन्हें शिक्षित करना और पख्तून समाज में सुधार करना चाहते थे और अंततः वे काफी हद तक अपने लक्ष्य में सफल भी रहे।

एनएमएमएल के अध्यक्ष प्रो. लोकेश चंद्रखान अब्दुल गफ्फार खान की प्रपौती सुश्री यास्मिन खान, संस्कृति मंत्रालय के अपर सचिव श्री के. के. मित्तल, संस्कृति मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुश्री सोनिया सेठी ने भी इस अवसर पर संबोधित किया।
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आईपीएस/सीएस-2644